हमने जीत लिये जग सारे
By Ateet Maurya
हमने जीत लिये जग सारे,
जीत ना पाये एक ह्रदय तुम्हारे,
स्वर्ग भले ही भोग रहे है,
फिर भी लगते हैं हम बेचारे,
तुम कहते थे कुछ ऐसा कर जाओ,
मन मेरा तुम पर अर्पण हो जाए,
प्यार की इस दूसरी परिभाषा में,
हम कुछ भी ऐसा ना कर पायें,
चाँदनी बन तू मुझ पर छा जाती है,
सूरज मैं क्यों ना बन पाता हूँ?
तुम्हारी यादों के खंजर से,
हर बार खुद को घायल कर जाता हूँ,
जीवन के अनुभवों से सीख लिया,
हमने हर मुश्किल से लड़ना ,
मगर लेकर ऑस लौटने का बैठा हूँ,
सो छोड़ ना पाया खुद से ही भिड़ना,
सिमटकर अन्दर ही तब रह जाते,
आखों के सावन से भीगे शब्द हमारे,
लेकिन बन बैसाखी ये स्याही आया,
अब नहीं लगते हैं हम बेचारे।
By Ateet Maurya

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