हम हार गए वक्त जीत गया
By Vandita Kumari
आज एक और दिन बीत गया
हम हार गए वक़्त जीत गया ।
अपनों के साथ की चाहत में
कुछ साथ रहा कुछ छूट गया।
ये सड़क दूर तक जाती है
पर छोर कहां है पता नहीं
तुम चाहो साथ में आ जाओ
हम बंजारों का कोई ठौर नहीं ।
इस बेगानी सी दुनिया में
हम भी अपना ढूंढने निकले थे
कुछ मिले अपना कहने वाले
मृग मरिचिका से लगने वाले।
तुम चाहो पथिक बन जाओ
कुछ कदम हमारे साथ चलो
पर थक जाओ तो रुक जाना
ये सड़क दूर तक जाती है।
अपनेपन की आपा धापी में
सब पीछे रह जाता है
अपना कहने वाला भी
साथ छोड़ चला जाता है।
आज एक और दिन बीत गया
इस दूर सड़क पे चलते हुए
तुम भी थक के बैठ गए
लो हम हार गए और वक़्त जीत गया।
By Vandita Kumari

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