हम भी किसी को समझाएं क्यों..
By Jaspinder Singh Bains
जब कोई सुनता ही नहीं, हम भी सुनाएं क्यों,,
जब कोई इरशाद नहीं कहता, हम भी फरमाएं क्यों,,
दिन घटते हैं जन्मदिन के साथ, इसे हम भी मनाएं क्यों,,
जब सपने पूरे नहीं होते, आंखों को और दिखाएं क्यों,,
जब कोई हमारा नहीं, किसी का होने को जताएं क्यों,,
जो परदा पड़ा लाशों पर है, उसे हम भी उठाएं क्यों,,
सोया हुआ जहान सारा, जहान को हम भी जगाएं क्यों,,
जब उजड़ते हैं मकान आंधियों के साथ, हम भी घर बसाएं क्यों,,
इंसान पहले ही डूब रहे, इन्हे और पागल बनाएं क्यों,,
खुदा गर तूं खुदा है, तुझे हम भला सजाएं क्यों,,
जो राज़ राज़दारों का है, उसे हम भी बताएं क्यों,,
जो राज़,, राज़ नहीं रहा,, उसे हम भी छिपाएं क्यों,,
जब झूठ दबता नहीं किसी से, सच को हम भी दबाएं क्यों,,
ये बैंस दुनिया फना होने को है, हम भी किसी को समझाएं क्यों.....
By Jaspinder Singh Bains

Comments