हम दोनों
By Sandeep Sharma
दिन का सूरज रात का चंदा हम दोनों
जलता सहरा गिरता बादल हम दोनों
खट्टी इमली मीठी साकर हम दोनों
बहती नदिया ठहरा सागर हम दोनों
छोटी दुनिया लंबा रस्ता हम दोनों
एक अशआर के हैं दो मिसरे हम दोनों
बहते बहते कहाँ को ठहरें ख़ुद ही दरिया और किनारा हम दोनों
एक दूजे के यूँ साथ चलेंगे जैसे मोम और बाती हम दोनों
एक दूजे के यूँ साथ में आएं जैसे ईद-दीवाली हम दोनों
एक दूजे के बिना अधूरे जैसे धरती अम्बर हम दोनों
एक दूजे से दूर जो होकर पास है फिर भी हम दोनों
आओ चलो आज़ाद अब हो जाएं क़ैद रहेंगे कब तक हम
By Sandeep Sharma

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