हम, जिंदगी और किस्मत
By Akshita Goyal
इस जिंदगी के जंगल की बस इतनी सी है कहानी
हम लकड़ियां है, और हालात पानी
सब भीग कर ही आगे को चल पाते हैं
कुछ लकड़ियां जलती है, और सुख जाती है
कुछ हालात दर हालात गल जाती है
इस जिंदगी की रसोई की बस इतनी सी है कहानी
हम और किस्मत दो रसोइये है, और जिंदगी है बनानी
रसोई का दरवाजा रोज खुलता है और किस्मत को पहला मौका मिलता है हाँ ये गलत है, पर इस बात पर तुम रूठे नहीं रह सकते ये किस्मत तो बेजान है, पर तुम बहुत देर तक भूखे नहीं रह सकते रोज आते हैं सब रसोई में, फिर कुछ खाकर बाहर निकल जाते हैं कुछ रुककर अपनी दावत पकाते है कुछ किस्मत का परोसा निगल जाते है
By Akshita Goyal

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