हकिकत
By Ameya Bal
आज मै एक गुस्ताख़ी करना चाहता हू,
अपनी हकीकत अपनी जुबां से बया करना चाहता हू,
दुनिया के दस्तूर में एक और कहानी जोड़ना चाहता हू
जुबां से निकले हर लब्ज को साबित करना चाहता हू
अब आप पूछोगे मै कौन हू जिसे आप ध्यान से सुने,
और क्यों अपना कीमती समय जाया करें
गर ऐसा है तो सुनो आँख खोलकर और देखो कान से,
वो सच्चाई
जो अक्सर कहानी में जाती है पाई
करता हू अपना काम ईमानदारी से लेकिन तुम करने नहीं देते,
और बन गया बेईमान तो खुशी से मरने नहीं देते
पकड़ लूं गलती तुम्हारी तो दुनिया मुझे खलनायक कहती है,
और ऩरंदाज़ कर दू तो जीने लायक नहीं छोड़ती है।
फिर भी खड़ा रहता हू तुम्हारी रक्षा में नज़ाने कितने घंटे अपना घर छोड़कर
बदले में मिलता है गाली और नफ़रत का जहर घुट भर
एक अंगूठाछाप हमें हुकुम देता है, और हमारा जमीर उसे उलटे हात सलाम ठोकता है
गुनाहगार को पकड़ो तो उसे छुड़ाने में पूरी दुनिया जुट जाती है
और हमसे छुट जाए तो वर्दी उतर जाती है
याद भी नहीं आखरी बार कब मनाई थी ईद, दिवाली और होली
दिल का हाल - ए - बया करती हैं सीने पर लगी बंदूक की गोली
हा ये मेरी कहानी है और मै इसका नायक भी हू, खलनायक भी
सत्य की रक्षा और दुश्मनों का संहार करने वाला मै वो बदनसीब हू जिसकी जिंदगी चव्वनी और मौत लाखो में बिकती है।
और गलत को सही करते करते पूरी जिंदगी बित जाती है।
दुनिया समझें इसे कहानी, मै इस हकीकत से परे नहीं हू
बस आरज़ू यही है की मेरे हाथो आपका भरोसा कभी मरे नहीं, आपका भरोसा मरे नहीं।
By Ameya Bal

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