स्वाभिमान
By Santosh Kumar Koli
हम न किसी से कम,
बस, लगाओ दम |
हिम्मत की क़ीमत,
ज़िंदी जिद्दी विचार में |
अंदर से जगानी पड़ती,
नहीं मिलती हाट बाज़ार में |
हुकूमत उनकी ही थी, है,
रहेगी इस संसार में |
लोग खेत सोना उपजाते,
जो मोती उपजाएं थार में |
मज़बूत बनों, खुद की सुनों,
मत भरो पराई चिलम |
बस,लगाओ दम |
टांग नहीं,
हाथ पकड़ आगे बढ़ो |
ठेके की नहीं,
स्कूल की देहरी चढ़ो |
सांकल-संहिता नहीं,
संविधान पढ़ो |
हक़ हीरक त्याग से तपता,
तप की ज्वाला चढ़ो |
छोड़ो थैली,
छोड़ो रम |
बस, लगाओ दम |
हम न किसी से कम,
बस, लगाओ दम |
उस वंश के वंशज,
रगों में धर्मदान व जंग |
मन था चंगा,
उर्मि कठौती में गंग |
प्रताप, मीरा-सा चढ़ न सका,
अमिट, अमिश्र रंग |
खुद की पहचान, खुद के इतिहास को,
खुद ही लगा ली ज़ंग |
दब्बू मिसल, असल नसल की,
नसों में जाएगी रम |
बस, लगाओ दम |
जो एक बार डरा,
वह हमेशा डरता है |
दब- दबके जीने वाला,
दिन में दस दफ़ा मरता है |
ज़िंदा हो तो ज़िंदा दिखो,
समाज तसदीक़ चाहता है |
वैसे तो पशु भी,
विचरण, प्रजनन, व पेट भरता है |
दुनिया दिखते को मानती,
दिखाओ ज़िंदा हैं हम |
बस, लगाओ दम |
हम न किसी से कम,
बस लगाओ दम |
By Santosh Kumar Koli

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