स्वपन
By Vipul Jain
यह रात क्यूं कम हुई जा रही है ,
नजरों से वो क्यूं नही हटे जा रही है ,
उसकी ज़ुल्फ़ों में क्यूं अजीब चिंता सता रही है ,
शायद वो नींद में भी मेरे ख्वाब सजा रही है ,
एक गहरी सोच में वो आहे भरे जा रही है ,
शायद नींद में भी मुझे खोने से कतरा रही है ,
मखमली कपड़े में वो कहर ढा रही है ,
शायद वो मुझे अपनी बाहों में बुला रही है ।।
उसके बदन से खुश्बू की महक आ रही है ,
शायद मुझे उससे मिलने की लालसा जगा रही है ,
कब नींद से आंखे खोले वो , इंतजार में रात कटे जा रही है ,
शायद वो लड़की नींद में भी सिर्फ मुझे चाह रही है ।।
By Vipul Jain

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