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स्त्री के जीवन में कभी रविवार नहीं आता

Apr 17, 2023
2 min read

By Rajesh Kumar Verma


सबकी सेवा करना है, उसका परम कर्तव्य

सतत करती है काम, क्या जाने वो आराम

उसके हिस्से में कभी अधिकार नहीं आता

स्त्री के जीवन में कभी रविवार नहीं आता।१।


पशु से भी बदतर है उसकी अपनी जिन्दगी

घर की दहलीज में कैद है, उसकी जिन्दगी

बिना शिकायत करती है, वह सबकी सेवा

उसके हिस्से में कभी आराम नहीं आता।

स्त्री के जीवन में........…....................।२।


मायके से ससुराल तक सिमटी है जिन्दगी

उसकी ख्वाहिश का रखा नहीं जाता ध्यान

व्यस्त है वह सबकी फरमाइश पूरी करने में

उसके जीवन में कभी अवकाश नहीं आता।

स्त्री के जीवन में.......…....................।३।


रखती है वह सभी की फर्माइशों का ध्यान

नहीं रख पाती है वह, कभी अपना खयाल

भोजन और सफ़ाई उसके हिस्से का काम

कभी कोई मदद करने को साथ नहीं आता।

स्त्री के जीवन में..........…..................।४।


छुट्टी हो या त्योहार, बढ़ जाते हैं उसके काम

बच्चे-बूढ़े और जवान, छुट्टी में करते हैं आराम

किस्म-2 के पकवान खिलाना, है उसका काम

कभी-कभी उसके हिस्से में, वो भी नहीं आता।

स्त्री के जीवन में....…...........................।५।



दोस्त पति देव के हो या फिर सास-ससुर के

बच्चों के हों या फिर अपने, जब आ जाते हैं

उनकी सेवा सत्कार करना है, उसी का काम

औरत के हिस्से में कभी आराम नहीं आता।

स्त्री के जीवन में...............................।६।


कमबख्त बारिश, जो अच्छी लगती बहुत उसे

सावन में आए या और कभी, दे जाती है काम

मौसम है सुहावना आज कुछ चटपटा हो जाए

उसकी हालत पर किसी को तरस नहीं आता।

स्त्री के जीवन में...…............................।७।


गम हो या खुशी करने पड़ते हैं उसे ही सारे काम

बुखार हो या दर्द फिर भी न करती है वह विश्राम

सर्दी गर्मी या हो बरसात, रखती है सबका खयाल

अपना खयाल रखना उसे, कभी भी नहीं आता।

स्त्री के जीवन में.…................................।८।


अपने नहीं रह जाते हैं, उसके अपने ख़्वाब

चाहकर भी अपने लिए, नहीं कर पाती कुछ

फिर भी कहते हैं सब,रखती नहीं खयाल मेरा

नारी के जीवन में, कभी भी न्याय नहीं आता।

स्त्री के जीवन में.................................।९।


उम्र गुजर जाती है, सबका रखते - रखते खयाल

सबके लिए दफ़न कर देती है, वो अपनी खुशियां

उसकी इच्छाएं आकांक्षाएं, सब दम तोड़ जाती हैं

हकदार वह जिसकी कभी वह मुकाम नहीं आता।

स्त्री के जीवन में....................................।१०।


By Rajesh Kumar Verma




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