सोने दो
By Suvankar Dash
वक्त के किताब में फिर नया पन्ना जोड़नाहै,मुझे सोने दो
कुछ अधूरे किस्से पूरे करने हैं, मुझे सोने दो
सोने दो के मिलों दूर सपनों की दुनिया में कोई कर रहा मेरा इंतजार
सोने दो के न जाने कितनी नींदें हैं ख्वाबों से मिलने को बेकरार
सोने दो के कल फिर उठके लड़ना है
सोने दो के भविष्य मेंनया इतिहास रचना है
सोने दो कुछ देर के हम जागे हैं देर तक
सोने दो बेफिक्र के इन थके नैनों को सुकून मिले
सोने दो राहों में कांटों ने जख्मी किया
सोने दो के अब नींद ही मरहम है
उठते ही करेंगे सारे काम हमें सोने दो।
By Suvankar Dash

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