सैनिक -देश के रक्षक
By Arushi Sharma
सीने पर खा लोह की बौछारे ना मैंने पीठ दिखायी है,
माटी पर बात जो आयी तो अपनी लाश बिछायी हैं,
बहना कलाई सूनी ना थी माँ का आँचल लिपटा था,
दस भारत माँ के बैरियों पर तेरा एक भाई भारी था,
तू रोना ना याद में मेरी मैं सोया नहीं शहीद हुआ,
गर्व से सीना फूला मेरा जो इस देश को अर्पित हुआ,
पिता मुझे क्षमा कर देना कंधों पर ले जाते वक़्त,
माँ को चुना आपसे पहले फ़र्ज़ उनका भी निभाना था,
जब याद आएगी मेरी सम्मान से सर उठ जाएगा,
मेरा शेर सा लाल सोच नाज़ से सीना भर जाएगा,
माँ की आन पिता मुझे को सबसे अधिक प्यारी थी ,
थी बस एक जीवन की बात मेरी माँ दर्द से पुकारी थी,
ओ माँ मेरी जो वचन दिया ना मैंने वो झुठलाया है,
तिरंगें में लिपटा ही सही तेरा लाल लौट कर आया है ॥
By Arushi Sharma

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