सूर्यास्त...
By Dr. Suboohi Jafar
सूर्यास्त, यानि जब सूर्य अस्त होता है, डूबता है,
उसे डूबना पड़ता है, फिर से उदय होने के लिए,
डूबता है, उन कार्यों का निर्वाहन करने के लिए,
जो आज अधूरे रह गए, उन्हें कल पूरा करने के लिए|
यह जो सूर्यास्त की गोधुली बेला है,
जहाँ सूर्य क्षितिज पर दिखता है,
मानो धरा के साथ आलिंगन कर,
वह दिन भर की थकन उतारता है|
पंछी उड़ चले अपने घोसलों की ओर,
किसान भी चला खेतों से घर की ओर,
अम्बर का यह सिन्दूरी रंग,
मोह रहा मन की डोर|
सूर्यास्त के पश्चात् नज़र आती है चन्द्रमा की चांदनी,
और धरती पे छा जाती है, जुगनुओं की चादर घनी,
सागर की लहरें चाँद के साथ करती हैं अठखेलियाँ,
मंद- मंद हवाएँ बहती हैं, छा जाती हैं सरगोशियाँ|
ये अँधेरी रात सबको यह बतलाती है,
इस दुनिया में कुछ भी स्थिर नहीं है, सबको यह समझाती है,
जिस प्रकार सूर्योदय और सूर्यास्त, अपरिहार्य हैं,
उसी प्रकार सफ़लता और असफ़लता भी जीवन के दो पार्श्व हैं|
और जिस तरह सूर्य अस्त होकर विचलित नहीं होता,
समान तेज और स्फूर्ति से पुनः उदय होता है,
उसी प्रकार विषम परिस्थितियों में भी,
विश्वासबनाएरखनाहै, आगेबढ़तेजानाहै|
By Dr. Suboohi Jafar

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