सूर्य व संध्या
By भारती बिंदु
सूर्य आज बढ़ चला
द्रुत तीव्र गति बढ़ा !
वेग रुके न आवेग रुके
सप्त अश्व रथ चढ़ा !!
एक आह एक चाह
एकटक देख रही राह !
ओढ़ लाल सुर्ख चुनर
नयन नत रक्त अधर !!
प्रियतमा संध्या आज
वरण करेगी सूर्य राज !
दे आशीष मात निशा
कलरव हो चहुं दिशा !!
सूर्य संध्या सुमिलन
शुभ रहे नव जीवन !
नव बात नव प्रभात
सुखद सौम्य सौगात!!
डा भारती झा
By भारती बिंदु

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