सुहाता गांव है मेरा
By Sadhana Joshi
पहाड़ी धार के ऊपर,सुहाता गांव है मेरा।
बुलाकर पास वो अपने,रिझाता गांव है मेरा।
जहां पर धूप की किरणें,सलामी रोज देती है।
सितारों को छुओ नित तुम,सिखाता गांव है मेरा।
उजाले टिम टिमा करके,वनों को रौशनी देते।
दिखा करके हमें चोटी,चढाता गांव है मेरा।
बटोही राह चलता है, दिलों में प्यार ले करके।
घरों की भी दिवालो को मिटाता गांव है मेरा।
बडी चाची सभी अपनी, नहीं कोई पराया है।
चमन हर पल बहारों का,खिलाता गांव है मेरा
By Sadhana Joshi

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