सुभट का अभिनंदन
By Abhishek Kumar 'Shahi'
ऐ वक्त के पहिये अपनी गती को अवसान दो।
कुछ क्षण नयनों को देखने ये मुहर्त महान दो।।
रोककर प्रकृति के अजस्त्र प्रवाह को ,
ये घड़ियां ठहराओ तुम।
ऐ माली डुलाकर बसंत डालियों को,
कुसुम पंखुड़ियां बरसाओ तुम।।
ऐ परवरदिगार जलधि जल में इतना ज्वार दो।
उठकर तटों से तीव्र लहरें वीर के पांव पखार दो।।
ऐ दिनकर देख तेज जरा सुभट के दिपते भाल में।
उतर कर आजा उदयाचल से आरती की थाल में।।
ऐ हवा उड़ाकर धूल जमीं का मष्तक उसके चंदन कर।
वीर वतन आया है अपना कोटि-कोटि अभिनंदन कर।।
By Abhishek Kumar 'Shahi

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