सुबुगाहट
By Prashant Vatsa
पेट में गुदगुदी, मन में अजीब सी हलचल की बहार हैं।
दिल की धड़कन को ना जाने किसका इंतजार हैं।
यकीन तो नहीं हो रहा पर क्या इसका ही नाम प्यार हैं!
होठों पर मुस्कुराहट, आंखों में शर्म, जुबां पर आता उसी का नाम हैं।
एक अजब सी बेचैनी, क्या यह मेरा सोलवा साल हैं।
ना आंखों में नींद, ना दिल में करार है।
ना जाने मुझ पर यह छाया कैसा खुमार हैं।
बस हर घड़ी हर लम्हा उसी का इंतजार हैं।
By Prashant Vatsa

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