सुबह का सपना
By Komal Paradkar
आज की सुबह कुछ अलग सी थी।
चेहरे पे हलकी सी मुस्कुराहट भी थी ।।
दुनिया कुछ तो बदली बदली थी ।
हवा मे न नई खुशबू बह रही थी ।।
एक ऐसी दुनिया को मेने मेहसूस किया ।
जहा ना था कोई बुरा, ना कोई गम का साया ।।
न किसी के मन मे कोई बैर था ।
न किसी के दिल पे कल का कोई बोझ था ।।
सारी दुनिया जैसे एक संसार था ।
हर एक के लिये सबके मन मे स्नेह था ।।
ना कोई छगडा था दो वक्त रोटी के लिये ।
ना कोई रोता था अपने सपनो के लिये ।।
चारो तरफ हरियाली सी थी ।
जैसे भगवान ने नयी नयी दुनिया बनाई थी।।
बुराई का तो नामोनिशाण न था ।
पाप और पुण्य का कोई सवाल न था।।
काश ये सपना कभी सच हो जाये ।
दुवा है वो शक्ती से.. मन का विश्वास टुट ना जाए ।।
क्यों ना ये सपना हम सब रोज देखे ।
और एक दिन ये हकिकत मे बदल जाये ।।
By Komal Paradkar

Comments