सुनो ना..
By भारती बिंदु
सुनो ना....
तुम हो मेरी दिवास्वप्न सी..
कभी ओझल कभी सामने
कभी लुप्त हो किसी बहाने !!
दूर कहीं क्षितिज पर चल घूमें
अंबर धरा को जब हौले से चूमें!!
इक स्नेहदीप जला कर आएंगे
संग तेरे नव अनुराग राग गायेंगे!!
किन्तु कैसे हो यह सब संभव
त्वरित विलुप्त पलक झपकते
क्योंकि तुम हो मेरी दिवास्वप्न सी..
By भारती बिंदु

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