सुनेंगे क्या?
By Sherlly Reecha
कुछ कहना चाहती हु, सुनेंगे क्या?
कुछ कहना चाहती हु, सुनेंगे क्या?
हाँ
सच में हाँ या अद्यतन हाँ केह दिया आपने!
क्योंकी सच ये है की हर कोई सुनना चाहता नहीं,
असल में हर कोई सुनना चाहता ही नहीं
सच ये भी है की हर कोई सुनना जनता भी नहीं।
सब सुनते है खुड़के खातिर
और इसमें बाला क्या बुरा भी क्या ?
आख़िर इस जीवन को
कूद ही के लिए जिया जाता है ना।
ऐसे अनकही बातें
कहीं तोह वो जाती नहीं पर कभी कही में सुन् लेती हु
अब सुन लेती हूं या बुन लेती हूं
अनकही बातें या तो सुनती हूं या बुनती हूं
तो सुन लेती हूं या बुन लेती हूं
इसे ख्याल फिर आते है
फिर आता ये की ख़याल की भाला ख्याल भी किसे आता है
अनकही बातों की चालों एक बात बताऊ
कहीं तो वो जाती नहीं पर कभी कहीं वो सुन लेतीं
अब सुन लेती हूं या बुन लेता हूं
इसे सवाल रह जाता है
फिर आते है ख्याल बाला ख्याल भी किसे आते है खैर!
एस सोचते है हम,
मुझे लगता है की इन सारी चीज़ों के बिटवीन दी लाइन्स में ना जिंदगी कहीं चिप जाता है।
पर आपको नहीं लगता की कभी कभी पल दो पल इस जीवन को दूसरों के लिए भी जिया जाता है।
अब सवाल आता है की दूसरो के लिए जाए किसे?
केसे जिए दूसरों के लिए?
उन्हें महंगी चीजें देकर
जिंदगी बार के ऐशोआराम देकर
या जो वो मांगे उन्हें वो सब कुछ देकर
मुझे नहीं लगता एन मे से कुछ
खैर में कुछ कहने वाली थी
भूल गयी।
By Sherlly Reecha

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