सुख और दुख
By Pooja Mittal
एक दिन सुख और दुख बैठे थे साथ I
दोनो कर रहे थे अपनी बात II
सुख कहने लगा मैं हूँ अनाथ I
दुख कहने लगा मैं लाता हूँ सबको साथ II
सुख ने कहा जब भी मैं आया I
लोगो ने अपनो को ही कर दिया पराया II
सुख मे परिवार अकेला मुस्कुराया I
क्योकि अपने साथ घमंड मैं लाया II
दुख ने कहा जब भी मैं आया I
अपनो ने ही नही गैरो ने भी साथ निभाया II
एक दुख कि घडी मे सबको एक साथ पाया I
क्योकि प्यार और सदभावना मैं साथ लाया II
लेकिन फिर भी करते लोग सुख की फरियाद I
कोइ नही करना चाहता दुख को याद II
फिर दुख और सुख ने एक दुसरे को समझाया I
हम तो हैं एक दुसरे की छाया II
सुख के बाद दुख I
और दुख के बाद सुख II
है सदा ही आया I
एसे ही हॅसते रोते हमने साथ निभाया II
By Pooja Mittal

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