सिसकी तेरी मैं सुन रहा हूँ
By Vaibhav Agarwal
सिसकी तेरी मैं सुन रहा हूँ,
सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
तेरी आँखों को मैंने जबसे पढ़ा, जैसे मैंने तो सब सार पढ़ लिया
तेरी आँखों से मैं अश्रु चुन रहा हूँ, सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
न गालों को कभी हमने तेरे छुआ, न बालों को कानों के पीछे किया,
कानों की बालियों की मैं धुन सुन रहा हूँ, सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
अपने दुखों को दिल में दबाया, उस पर मुस्कराहट का पर्दा लगाया,
दुखों को तेरे तबस्सुम कर रहा हूँ, सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
तेरे हसीं दीदार को मैं तरसता रहा, मौसम भी बे सावन बरसता रहा,
अब हर मौसम मैं सावन फाल्गुन कर रहा हूँ, सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
तेरा रोना तड़पना मुझे सब मालूम है, हूँ मैं तेरे लिए तुझे सब मालूम है
बिना देखे सुने तेरी सब सिसकी मैं सुन रहा हूँ, हाँ सबसे लड़कर मैं तुझे चुन रहा हूँ
By Vaibhav Agarwal

Comments