सिपाही की बेटी
By Harsh Vardhan Poddar
मै उस शक्श को याद करती हूं,
जो जीने की इच्छा रखता हे सिरफ मर मिटने की ख्वाइश के लिए,
जो रातों मैं जागता है मेरी नींद की फरमहिश के लिए,
जो अपनो को ना मिलता है, मेरे अपनो के लिए,
जो अपना महल जलता है मेरा घर बचाने के लिए,
मै उस शक्श को सलाम करती हो मेरा कल आज और कल सजाने के लिए,
मैं उसको याद करती हूं मेरा अस्तित्व बचाने के लिए.……
मै उस पीता को आज आग देती हूं,
मेरा देश बचाने के लिए..…मेरा.…|
By Harsh Vardhan Poddar

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