साहसी बनो ...
By Dharitri Bora
क्या आज कल कलम से निकलते हैं सचाई की बाणी
सच आज कमजोर है
अकेला
दुब रहा हैं
तुम कलम से लड़ने निकले थे
लेकिन कभी जंजीर से बंधे हाथ से लड़ाई करते सुना हैं
उफ़ यह नियम!
दूसरों के नियमो से चलने वाले कलम से क्या परिवर्तन लाओगे ?
भूल जाउ
अगर भूल नहीं सकते तो साहसी बनो
साहसी बनो उन जंजीरो को तोड़ के खुले हातो से कलम उठाने को,
किसी और को दोषी करके लाभ नहीं है ।
आपकी कमजोरी आपको बांधती है,
कया ये कमजोर मन लेके जी सकोगे ?
क्या मन के भीतर भावनाओं को को शांत कर सकोगे
क्या विवेक को बार-बार मार सकोगे ?
खुद से पूछें एक बार ,
अगर नहीं
वक़्त के बदलने का इंतज़ार ना करो
ख़ुद ही बनो समय बदलने का एक कारण
हाथ में उठाऊ कलम
और चल परो सच के राह पर ।
Original Assamese : সাহসী হোৱা... কলমৰ আগেৰে নিগৰেনে আজি সততাৰ বাণী সত্য আজি দুৰ্বল অকলশৰীয়া ককবকাইছে কলমেৰে যুঁজ দিবলৈ তুমি ওলাই আহিছিলা কিন্তু শিকলিৰে বন্ধা হাতৰ কলমেৰে জানো যুঁজ দিয়া শুনিছা উফ এই নিয়ম! আনৰ নিৰ্দেশেৰে চলা কলমেৰে তুমি কি পৰিৱৰ্তন আনিবা পাহৰি যোৱা পাহৰিব নোৱাৰিলে সাহসী হোৱা সাহসী হোৱা সেই শিকলি চিঙি মুক্ত হাতেৰে কলম তুলিবলৈ । আনক দোষী লাভ নাই তোমাৰ দুৰ্বলতা বোৰে বান্ধিছে তোমাক এই দুৰ্বল মন লৈ জীয়াই থাকিব পাৰিবানে? মনৰ ভিতৰত থকা অনুভৱৰ সেই গুজৰণি শান্ত কৰিব পাৰিবানে? বিবেকক বাৰে বাৰে মাৰিব পাৰিবানে? এবাৰ সুধা নিজকে যদি নোৱাৰা সময় সলনি হোৱালৈ অপেক্ষা নকৰিবা তুমি হোৱা সময়ক সলনি কৰাৰ এক কাৰণ লোৱা তুলি হাতত কলম আৰু খোজ দিয়া সত্যৰ বাটত ।
By Dharitri Bora

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