सामर्थ्य
By Priyanka
धूप तेरी भी जेब में है,
अलहदा सी प्यारी जान तू।
चमकेगी तेरे ख्वाबों की रेत भी,
करके आज़ाद वो धूप ये मान तू।।
शरर सा शबब तेरा,
सहर सा इस क़दर रूहान है।
कि अर्श से फर्श तक का,
कतरा - कतरा नूरान है।।
उठा है तू इसी जमीं से,
गिरना भी जमीं ही पे है।
जमा ले जड़ अपनी,
और उडले दिल खोलकर;
आसमां फैला है बेशुमार,
यहीं बीच में इन दो जमीनों के।।
By Priyanka

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