सादगी का मोल
By Tanuja Joshi
तड़क भड़क की इस दुनिया में
सादगी का मोल ना होता,
कुछ ऐसे रह जाते है पीछे
जिनका कोई तोल ना होता |
आडम्बर की महफिल में
दब रह जाती है काबिलियत,
असली प्रतिभा छिप जाती
कमतर पा जाती शोहरत |
भव्य इमारत में ना दिखता
नींव के पत्थर का बलिदान,
सुदृढ़ बनाता काया कोई
शहंशाह बन जाता महान|
हुनर छिपा है जो किसी में
चाहिये कोई निखारने वाला,
स्वयं की पहचान कठिन
चाहिये जौहरी तराशने वाला |
बाह्य आवरण से परे
भीतर की परखो चमक,
गहरा पानी शांत दिखे
गगर अधजल जाये छलक| |
सादा जीवन उच्च विचार
जिसका कोई खोल ना होता,
शानो शौकत मात्र छलावा
सादगी का कोई मोल ना होता |
By Tanuja Joshi

Comments