सहमी सी रात
By Khayaal (Motilal Parakh)
एक सहमी सी रात हो, तू मेरे पास हो,
हाथों में हाथ हो, कुछ प्यारी सी बात हो,
हर लफ़्ज़ पे ये लब मेरे तेरे लबों को छूए,
इतने क़रीब हो दरमियाँ हवा भी ना गुज़रे,
तुम बिखर जाओ लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ मुझमें,
मैं भी सिमट जाऊँ यूँ अल्फ़ाज़ बन तुझमें,
जब छुए मेरे होंठ तेरे लबों को हर बात पे,
एहसास उसका सीधा तेरे दिल में जा उतरे,
फिर यूँही हर बात पर हम मुस्कुराए थोड़ा,
ये मुस्कान तेरी मेरी मुस्कान पे उतरे तो ज़रा,
बस उस लम्हे में काश ये वक़्त ठहर सा जाए,
कुछ जहन में आए तो बस तेरा ख़याल आए,
वो बाक़ी सी बातें दरमियाँ इन निगाहों से कर
इन आँखो में डूब कर बस बाहों में सिमट जाए,
बस उस रात का इँतज़ार है हमें कुछ अरसे से,
जब हम दिल खोल कर बयान हर राज करेंगे,
वक़्त बदलेगा ज़रूर पर इतना कहना है तुमसे,
सारी उम्र हम तुमसे, यूँ पगलों सा प्यार करेंगे।
By Khayaal (Motilal Parakh)

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