-सरहद से आई चिट्ठी -
By Sakshi Joshi
इंतजार था उसके आने का,
जब उसके अपनों के लिए चिट्ठी
आई!
माँ बनने वाली थी वो,
जब अपने हाथों में पाई!
हस्ती हुई छोटी-सी गुड़ियों भी,
चिट्ठी देख घबराई!
हिम्मत की छोटे भाई ने ,
और चिट्ठी पढ़कर सुनाई!
सुन कर चिट्ठी दंग हुए सब,
पर माँ की हिम्मत नहीं हार
पाई!
दोनों माँए रोती हुई,
गर्व से मुस्कराई!
और कहा की अमर है,
वो जवान जिसने अपनी
अंतिम सांसे,
धरती माँ की कोख में बिताई!
By Sakshi Joshi

Comments