“सम्मान”
Updated: Aug 7, 2025
By Akansha Niranjan
25 लाख का मुआवजा
1 सदस्य को नौकरी
शहर में मकान
लो आज फिर हो गया
बलात्कारियों का सम्मान ।
उड़ गई आज फिर
एक सोनचिड़िया
सूना हुआ आंगन
जिसमे बीते उसके सावन
बिलखती रही मां की आत्मा
बोली बड़ा बेरहम तू परमात्मा ।
कैसा ये शासन
कहां गया प्रशासन
आज फिर सवालों की
आई वही बहार है
लगा 2012 का मनहूस साल है ।
क्रोध से लाल हुआ
पूछता हर एक लहू है
आखिर कब तक और क्या
बस नाम की दुर्गा ओर काली
हमारी बेटी और बहू है ?
किस काम का वो राम मंदिर
कैसा वो राम राज
और कैसा वो समाज
जहाँ होती रहे बेटी दरिंदों का शिकार ।
आशा तो नहीं मगर फिर भी
करती एक गुहार हूँ
जिंदा जला दो ऐसे राक्षसों को
और दे दो त्वरित न्याय
उस तड़पती रूह को ।
आशा तो नहीं मगर फिर भी
करती एक निवेदन हूँ
करना ये सुनिश्चित हर ओर
ना टूटे फिर कभी किसी बेटी
के जीवन की डोर ।
By Akansha Niranjan

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