समझदार जिन्न
By Sarika Vishal Dabhade
मैं खेल रही थी सागर किनारे,
मिली मुझे एक बोतल
बंद पड़ी थी, रेत के सहारे ।
मैंने उस बोतल को खोला,
निकला उसमें से एक जिन्न,
"क्या हुक्म है मेरे आका?" वह बोला..
अचरज में मैं पड़ी,
हिम्मत जुटाकर बोली,
"खत्म कर दे भारत की गरीबी,
लाकर मेरे भारत में अमीरी"..
उसने कहा ...
"यह तो मैं नही कर सकता..
संभव है यह जब ..
पढ़-लिख जाएँ सब,
सब हो जाएँ साक्षर
बन जाएँ “आत्मनिर्भर"।
समझता है एक जिन्न भी यह,
साक्षरता सबमें जरूरी है
इसलिए आओ पढ़ाएँ खुशहाली लाएँ
भारत से गरीबी हटाएँ ....।
By Sarika Vishal Dabhade

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