समझ से परे
By Ritu Singh
तूफान का कहर
लहरों की तकरार
मंज़िल की तलाश
दूर दूर तक ना कोई आस
जिंदा हैं एक उम्मीद में
जिन्दगी के कफन की तकलीफ में
लक्ष्य पाने की आङ में छुप रहे हम
खुश रहने की जिद्द में अपनों से लङ रहे हम
‘अपना टाइम आएगा’ बोलके शांत हैं हम
पर आकांक्षी(एसपिरेंट) बनके रहने से संतुष्ट नहीं हैं हम
फेल हो जाने से जिंदगी नहीं ना खत्म हो जाती
इस फिलोसोफी के चलते भी आत्महत्या की दौङ है लगी रहती
अब तो कविता के शब्दों में भी नकारात्मकता है झलकती
हमारी रूह भी हमें अपना मानने से है मुकरती।
By Ritu Singh

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