सबसे पहले हवा साथ छोड़ गई
By Shashwat Shukla
सबसे पहले हवा साथ छोड़ गई
आस पास सब खुश थे
हस बोल रहे थे
बस वहां होना मगर
एक बोझ सा मालूम होने लगा
तब सबसे पहले
हवा साथ छोड़ गई
मन में बैठा सर्प
नीचे जिव्हा से आकर लिपट गया
चेहरों पर अब भी खुशी थी
देख कर आंखों में चुभन सी दौड़ गई
आंसू कब छलक आए पता भी न चला
तब सबसे पहले
हवा साथ छोड़ गई
पैने कांटे अब हाथों को चीर रहे थे
तापमान यूं बढ़ा कि परिवेश मे सब कुछ धुआं हो गया
कोई कुछ पूछ रहा था शायद
मेरे भविष्य या भूत के बारे मे
उत्तर देने को जब मुंह खोला
तब सबसे पहले
हवा साथ छोड़ गई
सर्प का विष अब जिव्हा से फेफड़ों में उतर आया
सांस तो ऐसे भी बंद थी
हवा की जगह इस पानी ने ले ली तो मन डूबने लगा
चिल्ला उठने की इच्छा हुई
तब सबसे पहले
हवा साथ छोड़ गई
By Shashwat Shukla

Comments