सफर बचपन का
By Magan Chawla
याद आते है वो बीते दिन
याद आते है वो बचपन के दिन
अच्छा वक़्त था शायद वो
इस ज़िन्दगी के सफर का
ना चिंता थी ना परवाह थी,
हमे उस दौर में
ना किसी की चाह थी
ना फितरत थी किसी को आजमाने की,
ना ख्वाहिश थी हमे कुछ भी कमाने की
बस सब्र था थोड़ी सी चीजों से
ना इच्छा थी कुछ ज्यादा पाने की
ना समझ थी उस वक़्त कुछ खास हमे
ना ही ज्यादा शोंक थे,
शायद वही वक़्त अच्छा था
जब मै छोटा बच्चा था
कभी हस्ते थे
तो कभी रोते थे
नहीं था रिवाज़ उस वक़्त किसी को मनाने का,
शायद बिना किसी चिंता के
दौर था वो सो जाने का
खेलते थे कूदते थे,
ना थकते थे
ना रुकते थे
खुश रहते थे ना किसी से शिकवा
ना ही किसी से वैर था,
इस ज़िन्दगी की भीड़ में
ना ही कोई गैर था
ना ही सिर पर भार था
ना ही कोई जिम्मेवारी,
बस लगती थी ज़िन्दगी यूं
जैसे है ये सबसे प्यारी
था एक दौर वो भी
जब खुश हो जाते थे
बहुत कुछ भी गवाकर,
शायद अब अधूरी रह जाती है
जरुरते हमारी
इतना कुछ भी पाकर
बस यही कहना चाहता हूं आखिर में,
सोच लो उस वक़्त के बारे में
क्या थे हम
और क्या अब हो गए,
कैसे था ये जीवन
कैसा अब बन गया,
क्या था दौर पहले
कैसा अब चल गया
बस याद कर उन दिनों को
और कर ले आसां इस ज़िन्दगी को
ना जाने अब कब
वो दिन और रात आयेगें,
जी लो जैसी भी है जिंदगानी तुम्हारी
शायद,
बचपन के दिन अब वापिस कभी ना आयेगें
बचपन के दिन अब वापिस कभी ना आयेगें।।
By Magan Chawla

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