सफ़ेद परछाईं
By Shivam Mishra
ये आँख बंद किए
कानों में उंगली दिए चलते रहते हैं
ये सिर झुकाए, साँसें थामे
जीवन गुजर करते हैं
इनके ऊपर आग की गरम लपटों का
कोई असर नहीं होता
ना ही बारिश की कोई बूंद
इन्हें भिगा सकती है।
इनके शरीर में, असंख्य घाव होने पर भी
ये रोते नहीं है, चिल्लाते नहीं हैं
इनके घावों से खून नहीं निकलता
बस कुछ सफ़ेद सा रिसता रहता है
ये अत्यंत सहनशील हैं, या संवेदनहीन?
कहना मुश्किल है
ये जीवित हैं, मृत हैं?
बोलना कठिन है
ये कहाँ से आए हैं, कहाँ जा रहे हैं?
पता नहीं
बस इतना पता है,
कि ये हर जगह मिल जाते हैं
हर गली, हर घर में
हर देश के हर शहर में
दिन-रात,
बिना सोये, बिना जागे
बस चलते रहते हैं
ये सफ़ेद परछाईं वाले लोग।।
By Shivam Mishra

Comments