सपनो का पेड़
By Teri Kalam
ये डगमगाती राहें कुछ बोल रही है,
ये चंचल सी हवाएं तुझे तौल रही है |
बिन रुके तू चलता चल,
दिल के अरमान बुनता चल |
क्या हुआ एक कल गया तो,
एक कल आगे भी आयेगा |
जिस मिट्टी में तू आज ज़ख्म सींचेगा,
कल उसी पे तेरे सपनो का पेड़ उग आयेगा,
तेरे सपनो का पेड़ उग आयेगा ।
By Teri Kalam

Comments