सदा-ए-दिल
By Gurnam
काश सदा-ए-दिल तुम तक पहुँचे,
इस से पहले के शायर दोज़ख पहुँचे!
कुछ और पहुँचे या न पहुँचे,
मगर उस तक उसका हक पहुँचे!
उसने किया दिया,कितना दिया ये स्वाल नहीं है मेरा!
स्वाल तो ये है कि हम कहाँ तक पहुँचे?
चाँद पे पहुँच के भी हमारी नियत से नहीं जाता!
के दुल्हन से पहले घर दाज का ट्रक पहुँचे!
By Gurnam

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