सत्य की शक्ति
By Dr. Suboohi Jafar
जीवन में नित नई चुनौतियाँ आती हैं,
संघर्ष का एक नया मानदण्ड बताती हैं,
परंतु संघर्ष चाहे जितना विकराल हो,
यदि साहस हो साथ, तो सफ़लता मिलती है।
चुनौतियों का सामना स्वयं भगवान ने भी किया है,
श्री राम हों या श्री कृष्ण, दोनों ने ही दुःख सहा है,
परिस्थिति को स्वीकार कर, अग्रिम पथ को चुना है,
सत्य पे सारा ध्यान केंद्रित कर, पापियों का नाश किया है।
अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, एक दिन सवेरा होता है,
जो राह में रुकता नहीं, पड़ाव उसी को प्राप्त होता है,
अंत जो भी हो, सच्चाई का दामन नहीं छोड़ना है,
हो सत्य की विजय सदा, असत्य को हराना है।
सतयुग में हर तरफ़ केवल सत्य ही विराजमान था,
जब झूठ बोलना महापाप के बराबर समझा जाता था,
आज कलयुग में चहुँ ओर केवल झूठ का बोलबाला है,
काँटों भरी सत्य की डगर पे, अब नहीं कोई चलता है।
झूठ ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है,
इस विकराल रूप के कारण सत्य मौन हो गया है,
इंसान, इंसानियत से विमुख हो, रावण रूपी बन गया है,
न घर में, न बाहर, अब कोई सुरक्षित रह गया है।
झूठ और लूट की लहर गली-गली चल पड़ी है,
लोग त्रस्त हैं और भ्रष्टाचार एवं अत्याचार हावी है,
संवेदना, करुणा कई बरस पहले दफ़न हो चुकी हैं,
धर्मराज दिखता नहीं, अधर्मियों की राजनीति ही सर्वोपरि है।
सत्य एक कर्म है और यही सबसे बड़ा धर्म है,
कर्त्तव्य सत्यनिष्ठ बन कर, शिलालेख पर लिखना नाम है,
आत्मबल और सामर्थ्य से, बदल जाता भाग्य है,
सत्य की असीम शक्ति से, प्रगति पथ सुनिश्चित है।
By Dr. Suboohi Jafar

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