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संभालो यारो। मैं आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।

May 6, 2023
2 min read

By Bhagawan Bose



जब मैं आजाद हुआ, मेरे सपने बहुत बड़े थे।

सपनों को साकार करने, सब कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े थे।

मेरी स्वर्णिम धरा ने आक्रांताओं की लम्बी गुलामी झेली थी।

सदियों बाद आजादी के दिन, मैने खुल कर सांस ले ली थी।

वो सांस मेरे सुनहरे सपनो की एक शुरुआत थी।

हकीकत होते इन सपनो में एक अलग सी कायनात थी।

सोचा था ,फिर मै सोने की चिड़िया कहलाऊंगा।

आत्मविश्वास से लबरेज था, मै विश्व गुरू बन जाऊंगा।

सफर बहुत कठिन था, लंबी राहगुजर थी।

यह कठिन राह, राष्ट्र की आवाम को मंजूर थी।

नए वक्त और बढ़ते आयाम के साथ, मै अपनी पीड़ा बोल रहा हूं।

संभालो यारों। मै आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।


कुछ सपने साकार हुए, बहुत कुछ अभी बाकी है।

बहुत कुछ हमने खो लिया , काफी कुछ पाना बाकी है।

गैरो ने छोड़ दिया,अब मैं अपनो से लुटता जा रहा हूं।

जो थे मेरी हिमाकत को, उन्ही के हाथो मिटता जा रहा हूं।

हुकूमत आती है हर बार, मेरे दामन के दाग मिटाने को।

वो ही हुकूमत लग जाती हैं, उन्ही दामन के दाग बढ़ाने को।

वैसे तो भारत माता के नाम से मेरा गुणगान है।

मगर ना वो इज्जत , मान और ना ही सम्मान है।

इस हालात में भी, सब को मैं एक ही तराजू में तौल रहा हूं।

संभालो यारों। मैं आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं


धर्म के इस नफरती आग में जल रहा हूं मैं।

सुलगते अंगारों पर नंगे पांव ही चल रहा हु मैं।

धार्मिक उन्मादो में जनता के लुहु से रक्तरंजित हूं मैं।

सौहार्द, सदभाव, प्रेम से अब वंचित हूं मैं।

मुझे खून के आंसू रुलाया है, गोधरा के उस दंश ने।

उन आंसुओ को और बढ़ाया, मुजफ्फरनगर के कुछ अंश ने

वक्त के साथ हालात बद से बदतर होते गए।

हंसते हुए कम , जाने वाले ज्यादातर रोते गए।

हिंदू ने मारा , मुस्लिम मरा।

मुस्लिम ने मारा, हिंदू मरा

मरते मरते आखिर मैं भी मरा।

मर कर भी मैं अपनी सांसे लेता रहा।

सबको प्यार का पैगाम देता रहा।

इस मंजर में भी, मै मोहब्बत का रस घोल रहा हूं।

संभालो यारों। मै आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।





बारूदो की आग में छलनी हुआ है मेरा सीना।

आतंकवाद के छाएं से गर्दिश में है मेरा जीना।

मेरे दिल के रूप दिल्ली में, संसद भवन पर चली है गोलियां।

जन्नत-ए-जहां कश्मीर में, हर रोज निकलती है आतंकवाद की टोलिया

दहका जब पुलवामा, ना जाने वो मंजर था किस मजबूरी का।

भुला नहीं हूं मैं वो हादसा, पठानकोट और ऊरी का।

मेरे वीर सपूतों ने हर बार मुझे इस मंजर से उबारा हैं।

मुंबई को लुहुलहान करने वाले उस कसाब को तो मारा है।

मगर और भी कसाब के मरने का, मै आज भी इंतजार झेल रहा हूं

संभालो यारों। मैं आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।


जब तक यह धरती, यह आसमां रहेगा

तब तक मेरा नाम हिन्दुस्तान रहेगा।

मर कर भी, मैं अपने दरवाजे सबके लिए खोल रहा हूं

संभालो यारों। मैं आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।

मैं आज का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं।


By Bhagawan Bose




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