श्री राम नाम जप (51 बार)
Updated: Jul 18, 2025
By Amol Mishra
निज अर्थ को जो टांग दे, तौलने बाज़ार में,
परमार्थ को जो आधार दे, अपने हर आचार में,
एक भाव से वंदन करे भील और भगवान का,
रावण में भी जो दिखाए, रूप तप और ज्ञान का,
वो राम है, जो जान कर भी जानकी का दांव ले,
वो राम है, जो रण विजित निज राज का भी दान दे।
वो राम है, जो हैं बसे वैदेह के संकल्प में,
वो राम हैं, जो हैं बसे पादुका के विकल्प में,
वो राम हैं, जो है बसे हनुमान के प्रताप में,
वो राम है, जो है बसे कैकेई के संताप में।
वो राम है, जो नाम है, डाकू भी साधु बन गया।
वो राम है, जो काम है, सागर पर सेतु बन गया।
वो राम है, जो दाम है, विभीषण को लंका मिल गई।
वो राम है, जो शाम है, दीपों की खातिर जल गई।
वो राम है, जो प्रेम हेतु शबरी के झूठे फल चखे,
वो राम है, जो गिलहरी के दान का भी बोध ले।
वो राम है, जो क्रोध में भी सांस को आराम दे,
वो राम है, जो बोल दे तो "मरा" को भी जान दे।
वो राम है, जो हर पाठ में प्रारम्भ है।
वो राम है, जो अंत में सत्य का अहसास है।
वो राम है, जिसने पिता हेतु पिता को ही खो दिया।
वो राम है , जिसने निजा को प्रजा हेतु खो दिया।
वो राम है, जो बन मनुज सीता हेतु रो पड़े।
वो राम है, जो हो विकल, भ्राता की बाहों में पड़े।
वो राम है, जो हैं बसे बैकुंठ औ वन ग्राम में,
वो राम है, जो हैं बसे वानरों के उत्पात में,
वो राम है जो हैं बसे ताड़का उछवास में,
वो राम हैं, जो हैं बसे अंगद के विश्वास में ।
वो राम है, जो आराम तज, लक्ष्मण सदा जगता रहा।
वो राम है, जो राज तज, भरत चरण धोता रहा।
वो राम है, जो प्राण तज, जटायु श्रेष्ठ और होता रहा।
वो राम है, जो कैलाश तज, स्वयं ॐ , हनुमान बन उड़ता रहा।
वो राम है, जो मंथरा ने कुटिल रूप धारण किया,
वो राम है, जो कैकेई ने तुच्छ वर का हठ किया।
वो राम है, जो बाली ने तारा का आंचल छुआ।
वो राम है, जो रावण ने शक्ति का ही छल किया।
वो राम है, जो लव कुश के कभी पिता ना बन सके।
वो राम है, जो पत्नी को संग ना रख सके।
वो राम है, जो उम्र भर तिल जिये या जले।
वो राम है, जो परमार्थ हित फिर सरयू में ही तर गए।
श्री राम सत्य, श्री राम शुभ, श्री राम शिव साकार हैं।
श्री राम सीता, श्री राम राधा, श्री राम त्याग अपार हैं।
श्री राम मन में, श्री राम तन में, श्री राम हर आंगन बसे।
श्री राम है अविराम और अभिराम चित्त में वो बसे।
वह राम तुम में, राम मुझ में, राम हर नश्वर में हैं।
श्री राम का वर्णन सदा ही श्री राम का आशीष है।
By Amol Mishra

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