शेह और मात
By Zarana Khamar
इस दुनिया की ये रीत ही सही
एक चेहरे पर मुखोटे कई
छुपते यहाँ पर राज़ सारे
यहां रिश्तो की कोई मंज़िल नहीं
कहानी क्या बताये तुमको
हर पन्नो पर राज़ कई
मुख मैं राम बगल में छुरी
मकसत एक और रास्ते कई
बेवफाई है खून मैं
खेल खेलना है फितरत इनकी
शेह और मात से काश
ख़त्म होती कहानी यहीं
By Zarana Khamar

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