शायरीHashtag KalakarMar 2, 20231 min readRated NaN out of 5 stars.By Mansiमैं भी वही हूँ तुम भी वही होरास्ते भी वही है मंज़िल भी वही हैफिर क्यों नजरे चुरा रहे होलगता है दग़ा करके वफाई की कसमें खा रहे होBy Mansi
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