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शायरी

By Mansi


गुरूर क्या है ये माँ बाप को खुश देख के समझ आया

वक़्त क्या है ये दोस्तों के साथ बीता के समझ आया




वेसे तो गया हूँ मैं बहुत जगह……..

मगर सुकून क्या है ये तुम्हें देख कर समझ आया ||


By Mansi




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