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“शायरी“

By Dineshkumar Hirani





“शायरी“

मीस हुए लोगों को मैं मिस करता हूँ,

मरे हुए लोगों को मैं किस करता हूँ,

ममी देखने जाता हूँ तो फीस देता हूँ,

मैं तो इन्सान की हेवानियत को,

अपनी किश्त देता हूँI


By Dineshkumar Hirani




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