शायर शायर क्या कहते हो
By Om Kishorbhai Sorathiya
शायर शायर क्या कहते हो , हम तो बस उसकी याद लिखते है।
उसकी पलकों को शराब लिखा तो आंखों को पूरा मयखाना,
जो पिए उसे आबाद जो न पिए उसे बर्बाद लिखते है।
शायर शायर क्या कहते हो , हम तो बस उसकी याद लिखते है।
वो जब गीली जुल्फे सवारे अपनी न जाने कितने फिसल जाए,
जो गिरे उसे सुकून जो ना गिरे उसे दर्द लिखते है।
शायर शायर क्या कहते हो , हम तो बस उसकी याद लिखते है।
जब तक उसे ना देखे जी सुकून नहीं कमाता,
देखे तो खुद को रईस जो ना देखे तो खुद को बेरोज़गार लिखते है।
शायर शायर क्या कहते हो , हम तो बस उसकी याद लिखते है।
ये आँखें, जुल्फे, आवाज तो चंद चीज़ है, उसे बयान करे भी तो कैसे,
बेशक लिखी उसकी अच्छाई कई पर बुरी को कभी ना बदनाम लिखते है।
शायर शायर क्या कहते हो , हम तो बस उसकी याद लिखते है।
By Om Kishorbhai Sorathiya

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