शाम मस्तानी
Updated: Jun 2, 2023
By Ananya Joni
एक तरफ आफ़ताब की तीव्र रौनक... न जाने कैसी प्रबलता सीखा जाती है। दूसरी तरफ शशि की शीतल ठंडक... न जाने कैसी शांति देकर जाती है। फिर आते सितारे लेकर अपनी चमक... न जाने कैसी दृढ़ सपने दिखा जाती है। जब हवा के झोंके बस छूकर चले जाएं... न जाने कैसी मोह महसूस करा जाती है।
रूख मोड़ते बादल रुई से दिखने वाले... न जाने कैसी प्यारी राहत दे जाती है। ये चारों ओर पंछियों की गूंजती चहक... न जाने कैसे राज़ बयान कर जाती है। खुले आसमान में इनको उड़ते देख... न जाने कैसी जोश को भर जाती है।
By Ananya Joni

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