“शान हमारी बेटियां”
Updated: Jun 8, 2023
By Vipasha Jain
लगी थी चारो तरफ़ मिठाइयाँ बटने,
इस ख़ुशी में कि आने वाला है कुलदीपक घर में
पता नहीं था कैसे होंगे ये नौ महीने पार,
जिसके लिए बरसो से किया था इंतज़ार||
पर पता नहीं था यह तूफ़ान से पहले कि खुशियाँ थी,
जब सवाल खड़ा हो उठा कि होने वाला लड़का या लड़की थी
यह सदियों से चली आ रही कुरीति थी,
जिसने बांध रखी सबकी आँखों पर अन्धविश्वास की पट्टी थी||
पर सोच लिया था नहीं होने देंगे अपने बच्चे के साथ वो अत्याचार,
जिसके हो चुके थे कई बच्चे शिकार,
इसलिए अब एक ही तुकबंदी लगानी थी,
लड़कियों कि शान लड़कों से ऊँची बतानी थी||
एक ही तर्क ने सबको यह अहसास दिला दिया,
जब सबको यह बताया गया कि भगवान से पहले भी तो
उनकी अर्धांगिनियों का नाम लिया गया,
लगता है भूल गए है सब जन,
नहीं होगी लड़की तो कैसे चलेगा आपके घर का वंश
लगता है भूल गये हम सावित्री के तप को,
जो यमराज से बचाकर ले आई थीं अपने पति के प्राण
तक को||
इसलिए अब अंत में पूछना चाहती हूँ बस एक ही सवाल,
की बताइए किस शास्त्रार्थ में लिखा है कि
एक लड़के का होना पुण्य का काम और
लड़की का होना पाप समान||
By Vipasha Jain

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