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शहर की याददाश्त

Sep 2, 2024
1 min read

By Ekta Jasan


माँ का साया - घर का रास्ता और एक बस्ता .. भूल गई सब शहर नया था । लुका-छुपी धप्पा कहना, छत को बना लिया था खिलौना.. भूल गया सब शहर नया था । भात - तरकारी भर थाली और हमारा टिफ़िनकारी.. भूल गए सब शहर नया था । दूरदर्शन विक्रम - बेताल , शक्तिमान का वो अवतार .. भूल गया सब शहर नया था ।


By Ekta Jasan

 
 
 

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