शब्दों की गूफ़्तगू
By Ritu Singh
वो रमझम बारश क मटरगती
वो आनंद लेतेए चाय क चुक
उस कोपल के जम क खुशी म
उस सावन केचुलबुलेपन के इंतजार म
सुहानेरैना क आङ मअधं ेरेको सहना
नए भोर क आस मपुरानेजम को भलू ना इंकला क कृत सेतो हर कोई वाकफ है चाँद क तारीफ करनेकेलए तो हर कोई हाज़र है सुकून भरी साँझ क कहानी बताना कठन है शद का जाल बुननेमअभी भी कई लोग गरीब ह।
By Ritu Singh

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