शब्द कोशिशें है
By Kusum Sanju
न जाने कब से ढूंढती हूँ
वो शब्द
जो मेरे अहसासों को आकार दें
आवाज़ दें, उस कसक को
जो दिल में तो धड़कती है
पर कागज़ पर नहीं उतरती
वो दर्द, जिसकी गहरायी नापते
जाने कितने शब्द
कहीं डूब कर दफ़न हो गए हैं
मन के भारी, अंधे स्याह कोने
शब्दों से कहाँ रोशन होते हैं
शब्दों में दर्द का बोझ ढ़ोने की ताकत कहाँ
कहाँ इतनी गहरायी,
कि पीड़ा को निकाल कर, कागज़ पर ले आएं
शब्द खाली हैं, अर्थहीन
शब्द कोशिशें हैं
दर्द बांटने की
जो कामयाब नहीं होतीं
क्योंकि आंसुओ की नमी शब्दों में नहीं होती ।
By Kusum Sanju

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