शतरंज
By Kavan Tapankumar Vaidya
है ये खेल तो चलो खेलते है,
खिलोनो को हटा खुद को रखते है।
नहीं इस खेल के कोई नियम मैं जान गया,
देखा जब, बादशाह भी ढाई खाने चल गया।
था यहाँ में नया खिलाडी क्या करु?
खुद प्यादों ने बदला रंग मैं क्या करू?
प्यादों को सिखाई गई फिर वजीर की चाल ,
न टिक सके वो भी, हो गए सभी यहाँ पामाल।
वो प्यादे भी सब बोलो अब क्या करेंगे?
सुनी थी गूंगो की अंधी बात अब क्या करेंगे?
लगता है अब वजीर ही खुद चाल चलेंगे,
देके उनको मात फिर से आगे कदम बढ़ेंगे।
प्यादा हु मैं वो जिसे हरा नहीं ये सकते,
बना बनाया खेल अब बिगाड़ नहीं सकते।
नहीं रहा रंग कोई एक सामने वालो का ,
दिखा पहेली बार, पीछे चाल चलते प्यादों का।
चल के एक बाद एक बहोत दूर आ गए है,
चलते चलते अब खुदसे ही हार गए है।
खेल बहोत चला लम्बा ये, अब क्या करेंगे?
सिखायाभी हैआपने ये, बोलोअबक्याकरेंगे?
By Kavan Tapankumar Vaidya

Comments