वक़्त पर वक़्त नहीं होता।
By Sarita Gupta
निकलने की मुझको जल्दी थी,
उसने कहा, "रुको जरा"
सुनने का था वक्त नहीं,
बस पूछने के लिए मैंने पूछ लिया,
"कुछ कहना है क्या'?
मेरे बेतुके सवाल पर
उसने भी सवाल ही उठाया,
उत्तर में मेरे एक नया सवाल आया,
पूछा उसने,'जल्दी में हो?'
रोककर क्रम सवालों का मैंने कहा
'नहीं, बस समय निकला जा रहा,
प्रतीक्षा में है कोई खड़ा"।
प्रतिक्रिया में वह मुस्कुरायी,
पलकें झपकाई और एक साँस छोड़ते हुए कहा,
'ठीक है, आओ फिर।'
मेरे उठे कदम एक क्षण रुके,
'कहो, फिर वक़्त कहाँ मिल पाता है।'
चौड़ी हो गई उसकी मुस्कान,
वक्त तो हमेशा ही होता है,
वक़्त के साथ हमारी
प्राथमिकताएं बदल जाती है।
मैं अपने ही ख़यालों में बोल पड़ा,
"हाँ जब वक्त था मेरे पास, तो तुम नहीं थी
तुम आयी तो अब तुम्हारे लिए वक़्त नहीं है।"
दूर शून्य में देखते हुए वह दार्शनिक हो बोली,
वक्त तब भी था, आज भी है,
बस वक़्त पर वक़्त नहीं मिलता।
कभी वक़्त साथ होता है तो तुम दूर होते हो
तुम आते हो तो मेरे हाथ में वक़्त ही नहीं होता।
सच, वक़्त हमेशा ही होता है,
वक़्त पर हम साथ नहीं होते,
कभी मैं नही होती, कभी तुम नहीं होते,
वक़्त तो हमेशा ही होता है।
By Sarita Gupta

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